क्यूँ मन है इतना चन्चल
क्यूँ समझाना इसे है मुश्किल
दिन प्रतिदिन रखना है अटल
क्या है इसका कोई हल ।
कौंधा दिमाग में यह विचार
मीठे शब्द बढ़ाते प्यार
बुरे शब्द तीर समान
देते दुःख करते अपमान ।
सोचा बोलेंगे सोच विचार
मन में कहेंगे दो -तीन -चार
रखेंगे भावनओं का ध्यान
No अपशब्द only गुड़गान ।
सोचेंगे क्या हमें मिला
नहीं करेंगे कोई गिला
बीते कल पर न रोयेंगे
व्यर्थ समय न खोएंगे ।
बडों को देंगे सम्मान
छोटों को प्रेम से दान
मानेगें बात बिना कोई शान
उच्च विचार व्यवहार समान ।
किया हमने विचारों पर अमल
कुछ पल हुएं हम सफल
मन फिर करने लगा हठखेल
भूतकाल में क्यूँ हुए फेल ।
किसी का वार्तालाप न भाया
मन दूषित विचार ले आया
किया दोषारोपण भुलाया सुविचार
अपनी सफ़लता पर मन, मन ही मन मुस्काया ।
आया गुस्सा लायाा छोटापन
कहे अपशब्द दिए कुछ गम
दुखाये दिल नियंत्रण हुआ गुम
भूले उच्च विचार, नीच हुए हम ।
इंसान इसी तरह नीच और उच्च के बीच डोलता है
मन वश में हो तो महान वर्ना जानवर होता है
इंसानियत के व्यवहार के लिए मन पर control जरुरी है
चंचल, बुरे मन के अधीन मनुष्य ने मनुष्यता छोड़ी है ।।